ठिठुरता हुआ गणतंत्र

Ranjay Kumar

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ठिठुरता हुआ गणत्रंत का सारांश को लिखें / Write a summary of the trembling republic

तंग गणतंत्र का व्यंग: हरिशंकर परसाई जी ने गणतंत्र दिवस के मौके पर एक विशेष तरीके से देश की राजनीति और राजनीतिक स्थिति को व्यंग्यपूर्ण ढंग से चित्रित किया है। उनका दावा है कि देश के सभी राज्यों ने गति विकसित की है और इसे वह हंसीदार भाषा में बयान करते हैं।

वे बताते हैं कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली में आयोजित समारोहों में हर राज्य की ओर से आए गुट्टे और झाकियां देखना खुद में ही एक व्यंग्यपूर्ण स्थिति है जो हंसी और मनोरंजन का स्रोत बनती है।

उन्होंने पिछले वर्ष के कुछ घटनाओं को भी चुराया है और उनकी कविता में उन घटनाओं की कॉमेडी व्यंग्यपूर्ण चित्रण किया है। वे बताते हैं कि यह दिवस ठंग रहता है और हमें हर बार ठिठुरने का मौका मिलता है।

इसके अलावा, हरिशंकर परसाई जी ने गणतंत्र दिवस को बड़े ही व्यंगपूर्ण तरीके से वर्णन किया है। उनकी ताजगी, हंसी, और व्यंग्यपूर्ण दृष्टिकोण से भरी कविता में वह दिवस की विशेषता को हास्य से भरा हुआ बना देते हैं।

आखिरकार, उनकी कविता से हमें यहां तक का मेसेज मिलता है कि गणतंत्र दिवस को ठिठुराने का मौका हमें हर साल मिलता है, लेकिन इसमें हंसी और मज़ा भी होता है।

[5. Trembling Republic]

 हरिशंकर परसाई का जन्म कब हुआ था ?

(A) 1920

(B) 1924

(C) 1930

(D) 1950

26 जनवरी से पहले उस पर क्या पड़ती जाता है ?

(A) धूल

(B) फूल

(C) छाया

(D) बर्फ

स्वत्रंत दिवस बिंगता है वही गणत्रंत दिवस। …… है ?

(A) सहमता

(B) ठिठुरता

(C) जगमगाता

(D) हँसता हैं

ठिठुरता हुआ गणत्रंत में लेखक ने। …… व्यवस्ता पर करारा व्यंग किया हैं ?

(A) सामाजिक

(B) परिवारिक

(C) लोकत्रांत्रिक

(D) सहितकी

लेखक ने दिल्ली में कितने बार जाकर गणत्रंत दिवस का जलवा देखा ?

(A) दो

( B) तीन

(C) चार

(D) पांच

कौन पुस्तक हरिशंकर परसाई कि है ?

(A) तट की खोज

(B) जब की बात और भी

(C) भुत के पावँ पीछे

(D) सभी

किस प्रकार की विद्या में हरिशंकर परसाई ने लेखनी चलाई ?

(A) व्यंग -लेखन

(B) ह्यस्य -लेखन

(C) करुणा -लेखन

(D) भक्ति लेखन

हरिशंकर परसाई ने हिंदी में M .A कहा से पास किया था ?

(A) वनराश विश्वविद्यालय

(B) पटना विश्वविद्यालय

(C) नागपुर विश्वविद्यालय

(D) दिल्ली विश्वविद्यालय

…….. समरोह के अवशर पर मौसम खराव ही रहता है ?

(A) स्वतंत्रता दिवस

(B) गणत्रंता

(C) दशहरा

………. ठिठुरता हुआ गणत्रंत साहित्य कौन से विद्या हैं ?

(A) नाटक

(B) कहानी

(C) निबध

(D) एकांकी

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frequently asked questions

ठिठुरता हुआ गणतंत्र का मतलब क्या है?
ठिठुरता हुआ गणतंत्र एक कविता, कहानी या निबंध में राजनीतिक या सामाजिक स्थिति को व्यंग्यपूर्ण रूप से चित्रित करने का तरीका है।

ठिठुरता हुआ गणतंत्र के लेखक कौन हैं?
ठिठुरता हुआ गणतंत्र के लेखक कई हो सकते हैं, लेकिन इस बारे में विशेष लेखक का उल्लेख नहीं किया गया है।

ठिठुरता हुआ गणतंत्र किस शैली में लिखा जाता है?
ठिठुरता हुआ गणतंत्र को व्यंग्यपूर्ण शैली में लिखा जाता है जिसमें राजनीतिक और सामाजिक समस्याओं का विवेचन हंसी और तीक्ष्ण तरीके से होता है।

क्या ठिठुरता हुआ गणतंत्र साहित्य केवल राजनीतिक विषयों पर ही बल्कि अन्य क्षेत्रों पर भी हो सकता है?
हां, ठिठुरता हुआ गणतंत्र साहित्य न केवल राजनीतिक विषयों पर ही बल्कि अन्य क्षेत्रों पर भी हो सकता है जैसे कि सामाजिक, सांस्कृतिक, और मानविक सुधारों पर।

क्या ठिठुरता हुआ गणतंत्र साहित्य में कविता भी शामिल हो सकती है?
हां, ठिठुरता हुआ गणतंत्र साहित्य में कविता भी शामिल हो सकती है जिसमें राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर हंसी और व्यंग्यपूर्ण तरीके से चरित्रित होते हैं।

conclusion

आत्मसात के अंत में, ठिठुरता हुआ गणतंत्र साहित्य एक नए दृष्टिकोण और ताजगी से राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों का सामंजस्यपूर्ण और व्यंग्यपूर्ण चित्रण प्रस्तुत करता है। इसके माध्यम से हम अपनी समाजशास्त्रीय और राजनीतिक धाराओं को नए सोचने के तरीकों से देखते हैं और उसे स्वीकार करने के लिए प्रेरित होते हैं। यह साहित्य हमें मनोरंजन के साथ-साथ समाज के विभिन्न पहलुओं को समझने में भी सहायक होता है और हमें विचार करने पर मजबूर करता है।

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