बालकृष्ण भटट का परिचय

Ranjay Kumar

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सवाल 1: बालकृष्ण भटट के लेखक का वर्णन करें?

उत्तर – भारतेन्दु युग के लेखकों में बालकृष्ण भटट को एक अद्वितीय स्थान प्राप्त है! उनका साहित्यिक योगदान आधुनिक हिन्दी साहित्य के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। उनकी रचनाएं निबंध, उपन्यास, और कहानियों के क्षेत्र में हैं, जो साहित्यिक जगत में एक अलग पहचान बनाने में मदद करती हैं। उन्हें एक उत्कृष्ट निबंधकार, पत्रकार, और कवि के रूप में सम्मानित किया जाता है, जिसने अपने साहित्यिक कौशल से उदाहरणीय प्रभाव डाला है।

भाटक जी का जन्म 23 जून 1844 ईसा के इलाहाबाद में हुआ था, और उनका परिवार व्यापारिक था। माता पार्वती देवी ने उन्हें संस्कृति और पढ़ाई के प्रति उत्साह से भरा किया। शुरुआत में, उन्होंने संस्कृत में अपनी शिक्षा जारी रखी, लेकिन एक परीक्षा के कारण वह संस्कृत की अन्य भाषा की परीक्षा नहीं दे पाए। इसके पश्चात, उन्होंने मिशन स्कूल में अध्यापन का कार्य शुरू किया और 1869 से 1875 तक वहां रहे।

हालांकि, उन्हें ईसाई वातावरण से तकलीफ हुई और उन्होंने जल्दी ही अपने रास्ते बदलकर संस्कृत की अध्ययन की ओर मोड़ ली। भटटजी के परिवार के सदस्य चाहते थे कि वह व्यापार में हिस्सा लें, लेकिन उनका मन पंडित मन में ही बसा रहा। परिवार में हुए कलह ने उन्हें अपने पैतृक घर से दूर जाने के लिए मजबूर किया।

इसके बाद, भटटजी ने अपनी संस्कृत पठन की मेहनत और लगन के साथ जारी रखी, जिसने उन्हें एक प्रमुख साहित्यकार बनने की दिशा में मजबूत किया। उनका साहित्य न केवल उनके समय के लोगों को प्रेरित किया, बल्कि आज भी हमारी साहित्यिक धारा को उनके द्वारा गठित किए गए रचनात्मक सृष्टियों के माध्यम से हमें प्रभावित कर रहा है। उनका साहित्य भारतीय साहित्य के समृद्धि और समृद्धि का सूचक है, जिससे हम उन्हें आदर्श साहित्यकार के रूप में याद करते हैं।

बालकृष्ण भट्ट / Balakrishna Bhatt

भटट ने अपना सम्पूर्ण जीवन साहित्य क्षेत्र में कर्मठता और प्रेम से समर्पित किया! उनका साहित्य न केवल एक कला के रूप में है, बल्कि एक अद्वितीय सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है। उनके लेखन में आत्मपरकता, व्यक्तिगतता और कला-शैली का सांगग है, जो हिंदी साहित्य में एक नया मोड़ प्रदान करता है।

20 जुलाई 1914 को भटटजी की प्रयाग में आकस्मिक मृत्यु हो गई, लेकिन उनका साहित्य अब भी हमारी साहित्यिक धारा को प्रेरित कर रहा है। उनकी रचनाएं विभिन्न विषयों पर हैं, और उन्होंने राजनीतिक, सामाजिक, और साहित्यिक मुद्दों पर अपनी विचारशीलता का प्रदर्शन किया है।

भाटक जी के निबंधों में आत्मनिर्भरता और व्यक्तिगतता का संबंध साफ़ दिखता है। उन्होंने नहीं सिर्फ विशेष विषयों पर लेखन किया, बल्कि उन्होंने भी अपने निबंधों के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन और साहित्यिक योगदान के माध्यम से एक सामर्थ्यपूर्ण समाज की स्थापना में भूमिका निभाई।

उनके साहित्यिक योगदान के बावजूद, भटटजी को “हिंदी का एडिसन” कहना उचित है, क्योंकि उन्होंने अपनी कलम से न शिर्षकों में ही, बल्कि विशेषज्ञता के क्षेत्रों में भी निबंध रचना में अपनी प्रोवेस को प्रदर्शित किया।

इस रूप में, उनका साहित्य आज भी हमें एक उत्कृष्ट साहित्यकार, विचारक और कलाकार की अद्भुत विरासत के रूप में प्राप्त हो रहा है।

राजनीतिक निबंधों में जहां उच्च आक्रोश का सुस्त प्रतिनिधित्व है, वहीं साहित्यिक निबंधों में भावना का नृत्यरूपी अभिव्यक्ति होती है! भट्टजी ने अपने सामाजिक निबंधों में समाज के विभिन्न पहलुओं को छूने का प्रयास किया है और उन्होंने समाज में मौजूद बुराइयों के प्रति अपना आकर्षित दृष्टिकोण प्रकट किया है। साथ ही, उन्होंने नए समाज के लिए एक आदर्श प्रस्तुत करने का प्रयास भी किया है।

साहित्यिक-कलात्मक निबंधों में भट्टजी की विशेषता यह है कि उनकी भाषा सरल और मुहावरेदार है, जिससे उनके विचारों को सहजता से समझा जा सकता है। उनका शब्द चयन और आवेग से भरा हुआ है, जिससे पठनीय लेखनी का मजा उठाया जा सकता है। उनके निबंधों में उत्कट आकर्षण, त्याग की उत्कठा, और आत्मा के प्रति शिव की त्रीव लालसा सुंदरता से उभरती है।

इस रूप में, उनके निबंधों में भावनात्मक समृद्धि और साहित्यिक कला का प्रतिष्ठान होता है, जो पाठकों को एक अद्वितीय साहित्यिक अनुभव प्रदान करता है।

बालकृष्ण भट्ट हिंदी ‘प्रदीप ‘का संपादन किया ! उन्होंने निबंध की अलाबा उपन्यास -रहस्यकथा ,नूतनबरमचारी अजान एक सुजान यात्रा ,रसातल यात्रा ,उचित दक्षिणा ,हमारी घड़ी , सदभाव् का आभाव आदि लिखा ! भट्ट जी नई उपन्यास की अतरिक्त नाटक भी लिखें – पदामावती चंद्रसेन कीरताजुरनीय पशु चरित वेणीसंहार ,शिशुपाल बघ ,शिक्षादान ,नयी रौशनी का विष ,सीता वनवास ,पतित इत्यदि !

frequently asked questions

बालकृष्ण भटट का जन्म कब हुआ था?
बालकृष्ण भटट का जन्म 23 जून 1844 ईसा में हुआ था।

भटटजी का साहित्यिक योगदान क्या रहा है?
भटटजी ने हिंदी साहित्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया, उनकी रचनाएं निबंध, कविता, और कहानी रूपों में हैं।

भटटजी का कोई विशेष लेखनी शैली थी?
हां, भटटजी की लेखनी शैली में आत्मपरकता, व्यक्तिगतता, और कला-शैली का विशेष प्रयोग हुआ।

भटटजी के निबंधों में कौन-कौन से विषय होते थे?
भटटजी ने अपने निबंधों में समाज, राजनीति, धर्म, और साहित्य पर अपने विचार प्रस्तुत किए हैं।

भटटजी की मृत्यु कब हुई और उनकी उपलब्धियां क्या हैं?
भटटजी की मृत्यु 20 जुलाई 1914 को हुई थी, और उन्होंने अपने जीवन में हिंदी साहित्य को आर्थिक, सामाजिक, और साहित्यिक दृष्टिकोण से योगदान दिया।

conclusion

इस परिचय के अंत में, हम देख सकते हैं कि बालकृष्ण भटट एक अद्भुत साहित्यकार थे जो नहीं केवल अपने काल के प्रमुख निबंधकार थे, बल्कि हिंदी साहित्य के समृद्धि में भी बहुत योगदान करते रहे। उनकी लेखनी में आत्मपरकता, व्यक्तिगतता, और कला का सुंदर संगम था जिससे उनके निबंधों ने साहित्य प्रेमीयों को प्रभावित किया। भटटजी की साहित्यिक उपलब्धियों ने हमें समाज, राजनीति, और मानवता के प्रति उनके सजीव और उत्कृष्ट दृष्टिकोण से परिचित किया है। इनकी रचनाएं आज भी हमें उनके साहित्यिक योगदान की महत्वपूर्णता का अहसास कराती हैं और हिंदी साहित्य के समृद्धि में उनका स्थान अमिट है।

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