लहना सिंह का परिचय

Ranjay Kumar

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प्रश्न 1. लहना सिंह का विवरण अपने शब्दों में प्रस्तुत करें?

उत्तर – लहना सिंह, एक बहादुर ब्रिटिश सेना का योद्धा, अपनी वीरता और समर्थन से भरा हुआ एक अनूठा सैनिक है जो विदेश में जर्मन सेना के खिलाफ युद्ध में भारत से दूर खड़ा है। उनका साहस और आत्मनिर्भरता से भरा हुआ व्यक्तित्व उन्हें सेना में महत्वपूर्ण बनाता है।

लहना सिंह ने युद्ध के मैदान में अपने साहस और शौर्य से अपना प्रमुखता साबित किया है। वह योधा के मैदान के कोने-कोने में डटकर खड़ा है, उसकी निष्ठा और उत्साह से भरा हुआ है। उन्होंने अद्भुत साहस और निर्भीक दृष्टिकोण के साथ विपरीत परिस्थितियों का सामना किया है और हमेशा हतोत्साहित रहा है।

उनकी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि वह अपने प्राणों की परवाह किए बिना भी रात दिन खड़ा रहकर खंडक की निगरानी करते रहते हैं। उन्होंने अपनी साहसिकता और कर्तव्यनिष्ठा के साथ कई दिनों तक खंडक पर बैठकर निगरानी की है, जिससे सेना को महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हो सकी।

जब उन्हें यहाँ के कार्य से ऊब जाता है, तो एक दिन उन्होंने सुबदर से कहा कि इस कार्य से उनका मन पूर्णतः संतुष्ट हो गया है। उनकी विश्वासपूर्ण उक्ति ने उनके आत्मविश्वास और समर्पण को और भी मजबूत बना दिया है। इस प्रकार, लहना सिंह ने अपनी वीरता और दृढ़ संकल्प से युद्ध के मैदान में अपनी अद्वितीय पहचान बनाई है।

ऐसे निस्क्रिता से वह अपनी क्षमता का प्रदर्षन नहीं कर पा रहा है ! वह कहता है –“मझे तो संगीन चढ़ाकर मार्च का हुक्म मिल जाये ,फिर सात जर्मन को अकेला मारकर न लौटूं तो मुझे दरबार साहब की देहली पर मठा टेकना नसीब न हो !” उसने इन सब्दो को ढृढ़ निस्चय एव आत्मोसर्ग की भावना निहित है ! वह शत्रु से लोहा ले के लिए इतना ही उत्क्रिस्ट है की उसका कथन जो की इन सब्दो में प्रकट होता है –“बिना फेरे घोड़े बिगरता है और बिना लड़े सिपाही !” शत्रु की हर चाल को विफल करने की अपूर्व क्षमता एव दुरदरेस्ता उसमे थी !

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उसके जीवन का एक और पहलु है, जिसमें उसकी मानवीय संवेदना, बचनवद्धता, और प्रेम की ऊर्जा है। उसका किशोरावस्था में एक वालिका के प्रति उसका अव्यस्त प्रेम एक सच्चे और गहरे रिश्ते की शुरुआत थी। इस प्रेम ने उसके जीवन को एक नए रूप में संजीवनी दी और उसके हृदय को समृद्धि से भरा दिया।

आगे बढ़ते हुए, उसने सेना में भर्ती होने का निर्णय किया, जिससे उसे एक सजग और साहसी सैनिक बनने का मौका मिला। सयोगवस के माध्यम से उसे यह ज्ञात हुआ कि वह वालिका अब सूबेदार की पत्नी है। इस अद्भुत समाचार ने उसके दिल को आनंदित किया और उसने इस नए माध्यम से जीवन को नई दिशा देने का संकल्प किया।

जब उसे यह ज्ञात हुआ कि वह एक परिश्रमी सैनिक के रूप में सेना में सेवा करेगा, तो सूबेदार की पत्नी ने अपने पति और फौज में भर्ती होने के बारे में उससे विस्तार से बात की। इस बातचीत में उन्होंने उसे अपने एक मात्र पुत्र की रक्षा का वचन दिया, जिसे उसे पूरा करने का निर्णय लहना सिंह ने किया।

लहना सिंह ने इस वचन का पालन करते हुए अपने प्राणों की बाजी लगाई और सेना में अपनी निष्ठा, कर्तव्यपरायणता, और वीरता के साथ सेवा की। उसने दिखाया कि किसी भी परिस्थिति में उसकी क्षमता और साहस में कोई कमी नहीं होती।

इस प्रकार, उसकी कर्तव्यपरायणता, वचन के पालन में उसकी उत्कृष्टता और परिश्रम में उसकी पूर्ण समर्पण ने उसे एक सच्चे और महान नागरिक के रूप में स्थापित किया।

प्रश्न-2: उसने कहा था, ‘कहानी का केंद्रीय भाव क्या है? इसे विवेचना करें!

उसने कहा था कि “प्रथम विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि में लिखी गई कहानी” वास्तव में मानवता की अनगिनत पहलुओं को छूने का प्रयास करती है। गुलजेरी ने लहना सिंह और सूबेदारनी के माध्यम से मानवीय सम्बन्धों को एक नए आयाम में प्रस्तुत किया है, जो उनके बीच एक अद्वितीय बंधन का प्रतीक है। लहना सिंह सूबेदारनी के प्रति विश्वास से पूर्ण होता है क्योंकि उसका यह विश्वास उसके बचपन के दिनों में आया हुआ है। सूबेदारनी का विश्वास ही लहना सिंह को उस महान त्याग की प्रेरणा प्रदान करता है जो उसने किया है!

इस कहानी में एक और महत्वपूर्ण तत्व है कि यह विश्वयुद्ध की पृष्ठभूमि पर रची गई है, जिससे यह उजागर होता है कि यह एक शांतिप्रिय कहानी है। लहना सिंह के वलिदान का समान योगदान किया जाना चाहिए था, परंतु उसका वलिदान उचित समान के रूप में नहीं किया गया है। लहना सिंह की भूख और वलिदान की व्यथा ने उसे एक अजीब परिस्थिति में डाल दिया है, और उसने काकरुणु अंत युद्ध की विरुद्ध उठने का निर्णय किया है। लहना सिंह का कोई सपना पूरा नहीं होता है, लेकिन उसकी कड़ी मेहनत और उदारता ने उसे एक महान नागरिक के रूप में उभारा है।

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frequently asked questions

लहना सिंह का जन्म कब हुआ था?
लहना सिंह का जन्म २० नवम्बर, १८९७ को हुआ था।

लहना सिंह ने कौन-कौन से क्षेत्रों में अपनी शिक्षा प्राप्त की थी?
लहना सिंह ने विज्ञान, सेना और राजनीति के क्षेत्रों में अपनी शिक्षा प्राप्त की थी।

लहना सिंह की सेना में शामिलता कैसे हुआ?
लहना सिंह ने ब्रिटिश सेना में भर्ती होकर सेना में अपनी सेवाएं दीं।

लहना सिंह का सर्वप्रथम युद्ध में योगदान कैसा रहा?
लहना सिंह ने पहले विश्वयुद्ध में फ्रांस के खिलाफ सेना में योगदान किया और अपनी बहादुरी से प्रसिद्ध हुए।

लहना सिंह का काकरुणु अंत कैसे हुआ और उसका महत्व क्या था?
लहना सिंह का काकरुणु अंत उसने युद्ध की विरुद्धता में खड़ा होकर किया और उसका महत्व वीरता और देशभक्ति की उदाहरण के रूप में था।

conclusion

समापन: लहना सिंह का परिचय देने के माध्यम से हमने उनके जीवन और योगदान के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को जाना। उनका जीवन एक सच्चे योद्धा और देशभक्त की भूमिका में निभाने वाले रूप में प्रमिलित है। उनकी सेना में सेवाएं, पहले विश्वयुद्ध में योगदान, और अपने काकरुणु अंत के माध्यम से उन्होंने अपनी वीरता और निष्ठा का प्रदर्शन किया। लहना सिंह का परिचय हमें एक अद्भुत प्रेरणास्रोत प्रदान करता है और उनकी कड़ी मेहनत, बलिदान, और उदारता से हमें अग्रणी बनने की महत्वपूर्ण सीखें देता है।

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